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ठेकेदार से रिश्वत लेना इंजीनियर साहब को पड़ा भारी, ड्राइवर के साथ रंगे हाथ हुए गिरफ्तार

 Published : May 27, 2026 07:19 am IST,  Updated : May 27, 2026 08:59 am IST

उत्तर प्रदेश के मेरठ में ACO टीम ने राजकीय निर्माण निगम के जूनियर इंजीनियर योगेंद्र सिंह और ड्राइवर नीरज पाल को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। ठेकेदार के रुके 25 लाख रुपये के भुगतान के बदले रिश्वत की यह रकम मांगी गई थी।

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मेरठ में इंजीनियर और ड्राइवर रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार हुए हैं। Image Source : PTI

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में उत्तर प्रदेश पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक संगठन यानी कि ACO की टीम ने रिश्वत के एक मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ACO की टीम ने राजकीय निर्माण निगम के एक जूनियर इंजीनियर और एक ड्राइवर को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। दोनों पर ठेकेदार का रुका हुआ भुगतान जारी कराने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। ACO के मेरठ प्रकोष्ठ के प्रभारी निरीक्षक योगेंद्र कुमार ने बताया कि बागपत निवासी ठेकेदार सत्येंद्र सिंह तोमर ने शिकायत दर्ज कराई थी।

पहले 1.70 लाख रुपये की मांग हुई थी

प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि ठेकेदार की शिकायत में कहा गया था कि उन्होंने वर्ष 2023 में निर्माण कार्य पूरा कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद करीब 25 लाख रुपये का भुगतान लंबे समय से रोका गया था। ठेकेदार का आरोप है कि भुगतान जारी कराने के लिए राजकीय निर्माण निगम के जूनियर इंजीनियर योगेंद्र सिंह ने रिश्वत की मांग की। पहले 1.70 लाख रुपये मांगे गए थे, लेकिन बाद में यह रकम घटाकर एक लाख रुपये कर दी गई। शिकायत मिलने के बाद ACO टीम ने जाल बिछाया। मंगलवार सुबह ठेकेदार को केमिकल लगे नोट देकर मेडिकल थाना क्षेत्र के राजीवपुरम स्थित राजकीय निर्माण निगम के ऑफिस भेजा गया।

इंजीनियर ने की थी निकलने की कोशिश

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जेई योगेंद्र सिंह ने सीधे पैसे लेने के बजाय प्रोजेक्ट मैनेजर की गाड़ी के ड्राइवर नीरज पाल को रकम लेने भेजा। जैसे ही ड्राइवर ने एक लाख रुपये लिए, ACO टीम ने उसे मौके पर पकड़ लिया। इसके बाद टीम ड्राइवर को लेकर दफ्तर पहुंची। वहां मौजूद जेई योगेंद्र सिंह ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन टीम ने उसे भी हिरासत में ले लिया। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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